खरगोन · मध्य प्रदेश
संगठन परिचय
शस्त्र मेव जयते

संस्थापक
श्री नरेंद्र जोशी
(अतिशय)
युवाओं को राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और समाजसेवा से जोड़ने की संकल्पना से संगठन की स्थापना हुई।
त्रिशूल युवा संगठन एक गैर-राजनीतिक युवा संगठन है, जिसका शुभारंभ 22 अगस्त 2025 विक्रम संवत् 2082, भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को खरगोन, मध्यप्रदेश से हुआ।
इस संगठन की स्थापना श्री नरेंद्र जोशी (अतिशय) की संकल्पना से हुई, जिनके मन में युवाओं को राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं समाजसेवा से जोड़ने का विचार जन्मा।
त्रिशूल युवा संगठन का मूल भाव है कि युवा शक्ति को संस्कार, सेवा, संस्कृति और राष्ट्रभाव से जोड़कर समाज की सकारात्मक शक्ति के रूप में विकसित किया जाए।
संतों एवं महापुरुषों द्वारा दिखाए गए त्याग, सेवा, संस्कार और समर्पण के मार्ग से प्रेरणा लेकर संगठन हिंदू समाज में सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का प्रयास करता है।
गाँव-गाँव एवं समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सुंदरकांड, हनुमान चालीसा एवं अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जनजागरण और युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देना संगठन के प्रमुख प्रयासों में है।
संगठन का प्रयास है कि युवा अपनी आध्यात्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय शक्ति को पहचानें और अपने जीवन का कुछ समय समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित करें।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जनजीवन से जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाएँ।
इसके साथ ही वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण एवं विभिन्न सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा-भाव को मजबूत करना संगठन की कार्यदृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
त्रिशूल युवा संगठन का विश्वास है कि संगठित, संस्कारित और सेवाभावी युवा ही समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।
इसी संकल्प के साथ त्रिशूल युवा संगठन सेवा, संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभाव को आधार बनाकर युवाओं को जोड़ने तथा एक जागरूक, संगठित और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संत श्री सियाराम बाबा की पुण्यतिथि पर 365 सुंदरकांड का अनूठा आयोजन
निमाड़ के साक्षात हनुमान के नाम से प्रसिद्ध संत श्री सियाराम बाबा जी की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर दिनांक 11 दिसंबर 2025 को एक अनूठा एवं ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें 365 सुंदरकांड का अखंड पाठ किया गया। इस आयोजन में 365 पाठकों को पंक्तिबद्ध स्थान प्रदान किए गए और संपूर्ण सुंदरकांड का पाठ «सीता-सीता-सीता राम गाइये» की मधुर धुन पर अखंड रूप से संपन्न हुआ।
इस भव्य आयोजन की सबसे विशेष और भावपूर्ण विशेषता इसका मंच रहा, जिस पर केवल दो स्थान निर्धारित किए गए थे—प्रथम स्थान श्री हनुमान जी के लिए तथा द्वितीय स्थान संत श्री सियाराम बाबा जी के लिए। यह व्यवस्था आयोजन की श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक भाव को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती रही।
आयोजन में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पवित्रानंद गिरी जी का भी पावन आशीर्वाद प्राप्त हुआ। वे पूरे समय सुंदरकांड पाठ में उपस्थित रहीं और उन्होंने सभी पाठकों का भगवा अपर्णा पहनाकर स्वागत किया। उनकी उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए त्रिशूल युवा संगठन के संरक्षक श्री अतिशय जोशी ने अपनी पूरी टीम के साथ लगभग 75 ग्रामों में संपर्क किया। इस संपर्क अभियान की विशेषता यह रही कि इसमें ऐसे प्रबुद्धजनों एवं सुंदरकांड प्रेमियों से संपर्क किया गया, जिनकी रुचि सुंदरकांड के पाठ में थी। साथ ही गाँव-गाँव सक्रिय भजन मंडलियों को भी इस भव्य आयोजन से जोड़ा गया।
श्री अतिशय जोशी ने संपर्क के दौरान सुंदरकांड के महत्त्व को बताते हुए यह संदेश दिया कि सुंदरकांड केवल संगीतमय ही नहीं, बल्कि अखंड रूप में भी किया जा सकता है और अखंड सुंदरकांड का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्त्व है।
इस अवसर पर श्री अतिशय जोशी द्वारा सुंदरकांड के आयोजन को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण संदेश भी दिए गए, जिन्हें धरातल पर उतारने का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड संगीतमय होना चाहिए, लेकिन उसकी अखंडता भी बनी रहनी चाहिए। आयोजन में सभी का सहभाग हो, लेकिन सुंदरकांड के बीच अतिथियों का सत्कार अथवा अन्य औपचारिकताओं के कारण पाठ में व्यवधान नहीं आना चाहिए, क्योंकि अखंड का अर्थ ही है—अखंड सुंदरकांड।
उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि आयोजनकर्ता स्वयं भी पाठकों के साथ बैठकर सुंदरकांड का पाठ करें, ताकि आयोजन केवल व्यवस्था तक सीमित न रहकर स्वयं की साधना और सहभागिता का माध्यम बने।
साथ ही प्रतिवर्ष सुंदरकांड पाठ की संख्या बढ़ाने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से हिंदू युवाओं को सुंदरकांड के माध्यम से सनातन की मुख्य धारा से जोड़ने पर बल दिया गया, ताकि युवा पीढ़ी अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से और अधिक मजबूती से जुड़ सके।
इस आयोजन में उन भजन मंडलियों को भी साथ जोड़ने का संकल्प लिया गया, जो गाँव-गाँव जाकर स्वयं हनुमान का स्वरूप धारण कर श्रीराम का अलख जगाने का कार्य कर रही हैं। ऐसी अदृश्य हनुमत शक्तियों को संगठित कर सनातन संस्कृति और सुंदरकांड की परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने का भाव इस आयोजन की महत्त्वपूर्ण प्रेरणा रहा।
365 सुंदरकांड का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक भक्ति, अखंड सुंदरकांड की परंपरा, युवा शक्ति और सनातन संस्कृति को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास बना। संत श्री सियाराम बाबा जी की पुण्यतिथि पर आयोजित यह भव्य आयोजन आने वाले वर्षों में सुंदरकांड की परंपरा को और व्यापक बनाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
🌱 एक पेड़ माँ के नाम — परिवार के साथ 🌱
जन्म देने वाली माँ ने हमें जीवन दिया, धरती माँ उस जीवन को संवारने का अवसर देती है।
हम लगाएँगे, पीढ़ियाँ संभालेंगी।
इसी मातृभाव के साथ त्रिशूल युवा संगठन ने प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संस्कार के उद्देश्य से «एक पेड़ माँ के नाम — परिवार के साथ» अभियान का संकल्प लिया है।
इस अभियान का शुभारंभ 24 मई को शंभू पर्वत (मेहरजा) से हुआ, जिसमें 32 परिवारों ने अपनी माँ के नाम एक पेड़ लगाने और उसे वृक्ष बनने तक सहेजने का संकल्प लिया।
ये 32 परिवार इस हरित अभियान की पहली मिसाल हैं। हमारा लक्ष्य इस संकल्प को 10,000 परिवारों तक पहुँचाना है।
एक परिवार — एक पौधा। एक पौधा — एक जिम्मेदारी। 10,000 परिवार — एक हरित भविष्य।
आइए, अपने परिवार के साथ इस अभियान से जुड़ें और माँ के प्रति कृतज्ञता के साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन सामग्री व पटाखे मिठाई वितरण · बस्ती भाटली
दीपावली का प्रकाश तभी सम्पूर्ण है, जब उसकी रोशनी किसी और के आँगन तक पहुँचे।
इसी आत्मीय भाव के साथ खरगोन की भाटली बस्ती में 151 परिवार तक लक्ष्मी पूजन सामग्री पहुँचाई गई तथा बच्चों के साथ मिठाई और पटाखों की खुशियाँ साझा की गईं।
यह केवल सामग्री का वितरण नहीं, बल्कि अपने समाज को एक परिवार मानकर आत्मीयता, अपनत्व और खुशियाँ बाँटने का एक छोटा-सा प्रयास था।
क्योंकि त्योहार की सच्ची खुशी तब है, जब हमारे आँगन के साथ किसी और का आँगन भी जगमगाए। खुशियाँ बाँटने से घटती नहीं, दीपों की तरह हर दिल में जगमगाती हैं।